पंडित का अर्थ

पंडित का अर्थ होता है किसी ज्ञान विशेष में दश या कुशल। इसे विद्वान या निपुण भी कह सकते हैं। किसी विशेष विद्या का ज्ञान रखने वाला ही पंडित होता है। प्राचीन भारत में, वेद शास्त्रों आदि के बहुत बड़े ज्ञाता को पंडित कहा जाता था।
ब्राह्मण शब्द ब्रह्म से बना है, जो ब्रह्म (ईश्वर) को छोड़कर अन्य किसी को नहीं पूजता, वह ब्राह्मण कहा गया है। जो पुरोहिताई करके अपनी जीविका चलाता है, वह ब्राह्मण नहीं, याचक है। जो ज्योतिषी या नक्षत्र विद्या से अपनी जीविका चलाता है वह ब्राह्मण नहीं, ज्योतिषी है। इस तरह वेद और ब्रह्म को छोड़कर जो कुछ भी कर्म करता है वह ब्राह्मण नहीं है।

दैनिक राशिफल

'पण्डित' उपनाम

पण्डित उपनाम जो अधिकतर कश्मीरियों में पाया जाता था, अब सारे भारत में पाया जाता है। यद्यपि यह उपनाम अधिकतर (99%) हिन्दुओं में ही पाया जाता है तथापि इस उपनाम का प्रयोग होना कश्मीर, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार में भी होता है। बिहार (भारत) के क्षेत्रों में मिट्टी की वस्तुएँ बनाने वालों को भी पंडित कहा जाता है। हिंदी में उन्हें कुम्हार कहा जाता है। वे भट्ट, पुरोहित और राजपुरोहितऔर रावल के नाम से भी जाने जाते हैं। पश्चिम में पण्डित शब्द का प्रयोग किसी विधा के एक दक्ष, विशेषज्ञ व्यक्ति के रूप में भी किया जाता है।